बहरैन के कई उलमा ने एक बयान जारी कर देश की सरकार से गिरफ्तार किए गए धार्मिक नेताओं को तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा करने की मांग की है। उन्होंने बंदी बनाए हुए लोगों पर से अभी झूठे आरोपों को हटाने और उनके साथ किसी भी तरह के उत्पीड़न, अपमान और पाबंदियों को खत्म करने की अपील की है।
बयान में कहा गया है कि शिया उलमा की गिरफ्तारी धार्मिक नेतृत्व को कमजोर करने और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश है। उलमा का आरोप है कि यह कार्रवाई बहरैन में शिया समुदाय की मौजूदगी को कमजोर करने की एक संगठित कोशिश का हिस्सा है।
बहरैन के उलमा ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार किए गए कुछ उलमा के साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की खबरें मिली हैं। उनके अनुसार, इन लोगों पर दबाव डालकर कबूलनामे और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की गई। साथ ही उन्हें नागरिकता छीनने, कानूनी अधिकारों से वंचित करने और उनके धर्म का अपमान करने जैसी धमकियां भी दी गईं।
बयान में कहा गया कि उलमा अंबिया की विरासत को आगे बढ़ाने वाले और धार्मिक ज्ञान के रक्षक होते हैं। इसलिए उन्हें निशाना बनाना पूरे मुस्लिम समुदाय की पहचान और आस्था पर हमला है।
उलमा ने इन कार्रवाइयों को धार्मिक स्वतंत्रता और मानव सम्मान के खिलाफ बताया और सभी गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि हिरासत के दौरान किसी भी तरह के शारीरिक या मानसिक नुकसान के लिए बहरैन सरकार जिम्मेदार होगी।
बयान के अंत में कहा गया कि उलमा पर दबाव डालने से लोगों की ईमान कमजोर नहीं होगा और इल्मे दीन को धमकी, गिरफ्तारी या दमन से खत्म नहीं किया जा सकता।
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